डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर)। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पशुपालकों की सुविधा के लिए शुरू की गई मोबाइल वेटरनरी यूनिट (1962) डुमरियागंज क्षेत्र में सफेद हाथी साबित हो रही है। विभाग की घोर लापरवाही के कारण एक गरीब किसान के मवेशी ने समय पर इलाज न मिलने के कारण दम तोड़ दिया। पीड़ित किसान ने अब इस मामले की शिकायत आईजीआरएस (IGRS) के जरिए मुख्यमंत्री से की है।

'तीन दिन बाद आऊंगा'— संवेदनहीनता की पराकाष्ठा

​मामला डुमरियागंज क्षेत्र का है, जहां किसान नंदन भट्ट का मवेशी अचानक गंभीर रूप से बीमार हो गया। मवेशी की जान बचाने के लिए किसान ने तत्काल सरकारी टोल-फ्री नंबर 1962 पर कॉल कर मदद की गुहार लगाई। नंदन भट्ट का आरोप है कि मदद मिलने के बजाय उन्हें फोन पर बेहद गैर-जिम्मेदाराना जवाब मिला। कर्मचारी ने कहा कि वह अभी व्यस्त है और 'तीन दिन बाद' ही आ पाएगा।

इलाज के अभाव में मवेशी ने तोड़ा दम

​एक तरफ सरकार दावा करती है कि फोन घुमाते ही पशु डॉक्टर आपके द्वार पर होंगे, लेकिन नंदन भट्ट के मामले में यह दावा खोखला साबित हुआ। तीन दिन का इंतजार तो दूर, बीमार मवेशी ने कुछ ही घंटों में इलाज न मिलने के कारण तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। किसान के लिए यह न केवल भावनात्मक बल्कि बड़ा आर्थिक नुकसान भी है।

IGRS पर शिकायत, कार्रवाई की मांग

​पशुपालन विभाग के इस अड़ियल और लापरवाह रवैये से नाराज होकर किसान नंदन भट्ट ने हार नहीं मानी है। उन्होंने मामले की लिखित शिकायत मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर दर्ज कराई है। किसान ने मांग की है कि ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले और पशुओं की जान से खिलवाड़ करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।

पशुपालन विभाग पर उठे सवाल

​यह घटना सिद्धार्थनगर जिले में पशु चिकित्सा व्यवस्था की पोल खोलती है। सवाल यह उठता है कि यदि इमरजेंसी सेवा में तैनात कर्मचारी तीन दिन बाद आने की बात कहेंगे, तो आपात स्थिति में बेजुबान जानवरों की जान कैसे बचेगी?